550 केस, 400 मर्डर और 650 अपहरण, इस डाकू के नाम से कांपती थी पुलिस !

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पूर्व डाकू मोहर सिंह के निधन पर उनकी जीवन के कुछ विशेष बात ! वो साल 1960 था. जब मोहर सिंह ने बंदूक उठाई और बीहड़ में कूद पड़े। बताया जाता है कि मोहर सिंह कभी डाकू बनना नहीं चाहते थे लेकिन एक जमीन से जुड़े मामले में जब वो दर-दर की ठोकरें खाते रहे।अफसरों से और पुलिस से गुहार लगाते रहे लेकिन उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो सिस्टम से नाराजगी के चलते बंदूक उठा ली। चंबल का इलाका डाकूओं के लिए जाना जाता है।चंबल घाटी से कई ऐसे डाकू निकले जिन्होंने पुलिस और जनता के नाक में दम कर दिया था लेकिन कुछ डाकू ऐसे भी थे जो भले ही कानून की नजर से बड़े मुजरिम थे मगर स्थानीय लोगों के लिए वो किसी मसीहा से कम नहीं थे।पुलिस उनके नाम से कांपती थी लेकिन ग्रामीण उन्हें सिर-आंखों पर बैठाते थे ऐसा ही एक नाम था डाकू मोहर सिंह जिसके नाम का आतंक इतना था कि पुलिस के साथ-साथ इलाके के अपराधी भी उससे खौफ खाते थे। मोहर सिंह का मंगलवार को निधन हो गया।