मानव विकास संस्था के प्रयास से ग्रामीणों ने बनाया लकड़ी व बांस का पूल

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ग्रामीणों के उत्थान के लिये प्रयासरत है हमारी संस्था-बीरबल इचाक :- कौन कहता है आसमान में सुराख नही हो सकता एक पत्थर तबियत से उछालो तो यारो। यही बात चरितार्थ किया है डाढ़ा पंचायत के ग्राम बभनी बांका के ग्रामीणों ने। प्रखंड मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर जंगलों में बसा यह गांव सुविधाओं से आज भी वंचित है। गांव में आदिवासी और हरिजन के कूल 80 घर है। गांव में लोगो को आने जाने के लिए रास्ता भी नसीब नही है। यहाँ के लोगों का कहना है कि इस गांव में कोई सरकारी पदाधिकारी भी नहीं पहुंचते हैं। जब इसकी जानकारी मानव विकास संस्था के सचिव बीरबल प्रसाद को मिली तो उन्होंने गांव के लोगों से सम्पर्क किया और उनकी समस्या से रूबरू हुए। मानव विकास संस्था और गूँज संस्था दिल्ली की पूरी टीम गाँव पहुँचकर लोगों से मिलकर आने-जाने के लिए नदी के ऊपर लकड़ी के पुल और सड़क बनाने का सुझाव दिया जो ग्रामीणों को भा गया। गांव के पचास महिला-पुरूष मिलकर चार दिनों में लकड़ी और बाँस से पुल बनाकर तैयार कर दीया। लोगों ने काफी उत्साह के साथ श्रमदान किया। जिससे गूँज संस्था और मानव विकास संस्था के संयुक्त तत्वावधान में लोगों को 10 किलो आटा, 2 किलो दाल, 2 किलो आलू, 2 किलो नमक, 2 किलो सरसो तेल, 1 मच्छदनी और 2 साबुन देकर सहयोग किया। संस्था सचिव बीरबल प्रसाद ने बताया कि हमारी संस्था वर्षो से पिछड़े क्षेत्रों में जागरूकता और ग्रामीणों के उत्थान के लिये कार्य कर रही है। आज उसी का नतीजा है कि लोग अब जागरूक हो रहे हैं। आज ग्रामीणों ने संस्था के प्रेरणा से प्रेरित होकर बाँस और लकड़ी का पूल बनाया है।